"खटीमा (उत्तराखंड) से प्रकाशित साप्ताहिक समाचार पत्र"


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Monday, 8 May 2023

गुजरात सरकार ने मामूली केस में लगाई प्रतिष्ठा तो कोर्ट से लगी जबरदस्त लताड़।

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गुजरात सरकार एक ऐसे मुकदमे में अपील पर अपील किए जा रही थी जिसमें एक रिटायर्ड सरकारी ड्राइवर की पेंशन में मात्र ₹700 का इजाफा हो गया था सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सॉलिसिटर जनरल के सामने गुजरात सरकार के अधिवक्ता को कड़ी फटकार लगाते हुए हिदायत दी कि केंद्रीय या राज्य सरकार की तरफ से फिर ऐसी अपील आई तो जुर्माना लगाया जाएगा। जस्टिस बीआर गवई,जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संजय करोल की बेंच ने कहा कि सरकारों की इस आदत की वजह से अदालतों पर मुकदमों का बोझ बढ़ता जा रहा है उनका कहना था कि केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से दायर 40 फीसदी केस ऐसे हैं जिनका कोई मतलब ही नहीं है ऐसे मुकदमों से अदालतों का समय तो खराब हो ही रहा है जनता से टैक्स के रूप में वसूले गए पैसे को भी बेवजह खर्च किया जा रहा है। मामले के मुताबिक एक रिटायर्ड ड्राइवर की पेंशन में गुजरात हाईकोर्ट ने ₹700 का मामूली इजाफा कर दिया था, सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, पहले सुप्रीम कोर्ट की एकल बेंच ने गुजरात सरकार की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह पब्लिक के पैसे की बर्बादी है, लेकिन सरकार ने कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन दायर कर दी, एक बार फिर से जस्टिस गवई की बेंच के सामने यह मुकदमा आया तो जस्टिस जबरदस्त गुस्सा हो गए उन्होंने कहा कि किसी मुलाजिम को ₹700 का फायदा न हो जाए इसके लिए सरकार ₹700000 खर्चा कर देगी, जस्टिस गवई की बेंच ने कोर्ट में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि ऐसी याचिकाएं क्यों दायर की जा रही है? मेहता का कहना था कि सरकार ऐसी याचिकाएं लॉ अफसर से मशविरा करने के बाद ही दायर करती हैं। 

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