Thursday, 25 April 2019
Thursday, 18 April 2019
Saturday, 13 April 2019
Tuesday, 9 April 2019
राजनैतिक दलों के पैरों तले जमीन खिसक जाएगी,वोटरों की ये राय जानकर
नैनीताल लोकसभा सीट पर विभिन्न क्षेत्रों से जनता का रुझान जानने के लिए विभिन्न वर्गों के गैर राजनैतिक लेकिन प्रभावशाली लोगों से बातचीत के दौरान जो चीजें निकलकर सामने आई है वह राजनीतिक दलों के लिए झटका देने वाली हैं क्योंकि उनके घोषणा/संकल्प पत्र या विजन डॉक्यूमेंट पर लोग रत्ती भर भी भरोसा न करते हुए उसे एक रद्दी कागज से ज्यादा अहमियत नही दे रहे।लोगो का मानना है कि चुनाव ख़त्म होने के बाद इसे डस्टबिन में डाल दिया जाता है तो इसको लेकर बेमतलब का शोर क्यों?एक और मुख्य बात यह निकलकर आई है कि इस बार कोई लहर तो दूर की बात लोगों को यही विश्वास नहीं हो रहा है कि वाकई में चुनाव हो भी रहा है।प्रत्याशियों के वादों पर जनता का मानना है कि ये वोट लेने तक उल्लू बनाने की बातें हैं,चुनाव जीतने पर सब भूल जाते हैं। इस चुनाव में जोर शोर से उठे राष्ट्रवाद के मुद्दे पर लोगो का कहना है कि आम तौर पर इस देश का हर नागरिक देशप्रेमी है,और देश विरोधी काम करने वाले कुछ लोग यदि हैं भी तो वे सभी पार्टियों में शामिल हैं।प्रत्याशी चयन की बात पर लोग खुलकर किसी का नाम लेने से बचते दिखे लेकिन ये जरूर कहते हैं कि उनका प्रतिनिधि ऐसा हो जो उनके क्षेत्र और प्रदेश की समस्याओं की समझ रखता हो और उन्हें दमदार तरीके से संसद में उठाने की काबिलियत रखता हो,जो चुनावी रस्म अदायगी की बजाय उनके सुख दुःख में भी उनके बीच रहता हो।ऐसा प्रत्याशी जो जमीन से जुड़ा हो और बड़ी बड़ी बातों की बजाय जनता की सामान्य दिक्कतों को तबज्जो देता हो।और जो जनता के हित में निर्णय लेने के लिए अपने पार्टी आलाकमानों का मुंह ताकने की बजाय स्वविवेक से भी निर्णय लेने में सक्षम हो।इस लोकसभा में खड़े दोनों बड़ी पार्टियों भाजपा और कांग्रेस दोनों के बाहरी होने और पंडित ठाकुर के सवाल पर भी जनता की राय दिलचस्प रही,लोगो का कहना है कि प्रत्याशी हैं तो उत्तराखंड के ही।इसलिए वे बाहरी भीतरी,ठाकुर पंडित,भाजपा कांग्रेस जैसी संकीर्ण बातों में फंसने की बजाय उत्तराखंड के हितों और उत्तराखंडियत की बात करने वाले और यहाँ के लोगों की भलाई के लिए व्यापक सोच रखने वाले प्रत्याशी को चुनेंगे।वोटर लिस्ट से गायब हैं नाम, कईयों के परिचय पत्र बने ही नहीं तो कुछ के दो दो बने
निर्वाचन कार्य में लगे कर्मचारियों की लापरवाही के चलते चुनाव तिथि के पहले ही कई मतदाता लाईन से बाहर हुए।जो मतदाता बीते 5 सालों से क्षेत्र में निवास कर रहे हैं तथा जिन नये मतदाताओं ने तीन वर्ष पूर्व मतदाता परिचय पत्र के लिए आवेदन किया है उन लोगों के परिचय पत्र नही बन सके हैं ना ही उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज है।जबकि ऐसे मतदाता नवम्बर में संपन्न हुए निकाय चुनावों में वोट डाल चुके हैं।जहां इन मतदाताओं के परिचय पत्र बन ही नहीं पाए हैं वही कई लोगों के दो दो परिचय पत्र भी बने हैं।क्या निर्वाचन प्रक्रिया का मख़ौल बनाने वाले कर्मचारियों का यह आचरण क्षमा करने योग्य है?Friday, 5 April 2019
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