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Tuesday, 4 April 2023

सरकार की आलोचना किसी मीडिया/चैनल का लाइसेंस रद्द करने का आधार नहीं हो सकती:सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली : मलयालम समाचार चैनल मीडियावन (MediaOne) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. मीडियावन चैनल को सुरक्षा मंजूरी के अभाव में प्रसारण लाइसेंस को नवीनीकृत करने से इनकार करने के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के आदेश को सुप्रीम ने खारिज कर दिया है. दरअसल मीडियावन चैनल को गृह मंत्रालय द्वारा सुरक्षा मंजूरी नहीं मिलने की वजह से केंद्र सरकार ने उसके प्रसारण लाइसेंस का नवीनीकृत करने से इंकार कर दिया था. जिस को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी.

CJI की अध्यक्षता वाली बेंच ने आज इस मामले पर अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि एक मजबूत लोकतंत्र के लिए एक स्वतंत्र प्रेस आवश्यक है. सरकार की नीतियों की आलोचना व अभिव्यक्ति की आजादी को प्रतिबंधित करने का आधार नहीं हो सकता.  प्रेस की सोचने की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है.  किसी मीडिया संगठन के आलोचनात्मक विचारों को प्रतिष्ठान विरोधी नहीं कहा जा सकता है. जब ऐसी रिपोर्ट लोगों और संस्थाओं के अधिकारों को प्रभावित करती हैं, तो केंद्र जांच रिपोर्ट के खिलाफ पूर्ण छूट का दावा नहीं कर सकता है. लोगों को उनके अधिकारों से वंचित करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा को उठाया नहीं जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मीडिया का कर्तव्य है कि वह सत्ता से सवाल पूछे और नागरिकों को हार्ड फैक्ट्स (वस्तुस्थिति)  से अवगत कराए. CJI डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली SC बेंच ने यह भी कहा  कि सरकार को यह स्टैंड लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती है कि प्रेस को सरकार का समर्थन करना चाहिए. सरकार की आलोचना किसी मीडिया/टीवी चैनल का लाइसेंस रद्द करने का आधार नहीं हो सकती. अदालत के समक्ष कार्यवाही में अन्य पक्षों को जानकारी का खुलासा करने के लिए सरकार को पूरी तरह से छूट नहीं दी जा सकती है. सभी जांच रिपोर्टों को गुप्त नहीं कहा जा सकता, क्योंकि ये नागरिकों के अधिकारों और स्वतंत्रता को प्रभावित करती हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि  केवल 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का आह्वान करके सभी सामग्री को गुप्त नहीं बनाया जा सकता है. अदालतें एक दस्तावेज़ से संवेदनशील हिस्सों को हटा सकती है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन करने के लिए न्यायिक कार्यवाही के दौरान इसे दूसरे पक्ष को बता सकती हैं. मीडिया द्वारा सरकार की नीतियों की आलोचना को राष्ट्रविरोधी नहीं करार दिया जा सकता है. मीडिया की ज़िम्मेदारी बनती है कि वो सच को सामने रखें. लोकतंत्र मज़बूत रहे, इसके लिए मीडिया का स्वतंत्र रहना जरूरी है. उससे ये उम्मीद नहीं की जाती है कि वो सिर्फ सरकार का पक्ष रखें.  मीडिया वन चैनल पर प्रतिबंध के केंद्र के फैसले को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट

ने ये टिप्पणी की है.

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